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Showing posts from December 16, 2015

चन्द आश्यार

चन्द आश्यार ----------------------------------------------------------
उम्मीद के जहाँ में रहते है हम
कुछ सुनो तुम कुछ सुने हम मरकस कि बयानी है सुनो तुम
चहरे पर नादानी है कुछ सुनो तुम हम नहीं है शामिल कुछ सुनो तुम
रस्मों में बेईमानी है कुछ सुनो तुम आराधना राय "अरु"

विश्व- मैत्री

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स्रृष्टि , जब भक्ति बन गई
जगत जलचर सभी शुभ हो जायेंगे 
राम कि अयोध्या , जीवन हो जाएगे
श्याम और राधा का प्रेम यही पायेगे
विश्व जब सद भावना के लिए
विश्व -बंधुत्व दिवस बन जाएगा
कोई एक दूसरे से अलग कैसे रह पायेगा
गायन , वादन , नृत्य से
कला देवी शारदा कोजब पाएगे
राम -राज्य बन साकेत
सा जीवन यही हो जायेगा
प्रेम कि धारा ,सूर्ये कि शक्ति भी आएगी
जब जीवन तू स्वयं शिव सार्थक हो जायेगा
तब पार्वती को शिव राधा को कृष्ण पाकर
गणेशं कि मंगल कामना से
हर घर जगमगाएगा
उस दिन ईश्वर तू धरती
पर उत्तर आएगा
जीवन उन्नत शिखर हो जायेगा।
पूर्ति स्वयम ईश्वर वसुंधरा का हो जाएगा
स्त्री- पुरुष से ,सृष्टि करेगी,अपना श्रिंगार
जीवन निरंतर धीरे धीरे आएगा
,सुर का सुरेश्वर ,महेश्वरि भी अपनाएगा
"अरु " का जीवन सुरभित हो जाएगा
आराधना राय LikeComment

पूजा करने वालों को

कविता
------------------------------------ कब तक साहित्य की पूजा करने वालों को
फुटपाथ मिलेगा
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जीते जी ज़लने वालों को केवल
भूखा पेट मिलेगा
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धरा की बेटी को कब तक सामाजिक
अपमान मिलेगा
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नव- सृज़न करने वालों को केवल
क्या बाज़ार मिलेगा
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सूर्य परिक्रमा करती धरती को कभी
व्योम का साथ मिलेगा
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नारी- का अपमान कर चुके पुरुषों को ईश्वर सम
पूज कर सम्मान मिलेगा
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मुरझाए फूलों को क्या इस जीवन में
जीने का अधिकार मिलेगा
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पाखंड करते लोगों को केवल अब
भ्रमित संसार मिलेगा
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हाथ कटोरा भीख मांगती इस दुनियाँ को
क्या ईश्वर तेरा साथ मिलेगा
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वर्जनाओ पर टिकी …

तुम्हें महसूस करना

साभार गुगल


तुम्हें हर पल महसूस करना
अपनी हथेलियों में भरना
चाँद के टुकड़े में भीगों कर
माथे पर सजा कर रखना

साथ तुम्हारें हर पल रहना
माना तुम हो मेरा गहना

सूरज को मान कर गहना
किरणों की ऊष्मा को पहना
तेरीआभा को लगा कर सीने
तुम्हें अपना कर साथ चलना

आराधना राय "अरु"