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Showing posts from December 27, 2015

पनाहों में होता

साभार गूगल

27-12-2015 सज़दा गर तेरी पनाहों में होता 
असर कुछ इन दुआओं में होता मेरा घर रोशनी से आबाद होता
इमान गर तेरी वफाओं में होता मंदिर ना मस्जिद ना खाक होता
खुदा गर तेरी इन शिराओं में होता दिल का मकान यह खाली ना होता
तेरा नाम गर इन सितारों में होता चाँद रात उन का हसीं दीदार होता
चेहरा गर उनका ना हिज़ाबों में होता बसेरा अपना तेरे गाँव में "अरु" होता
पैगाम तेरा गर इन फिजाओं में होता आराधना राय "अरु"