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Showing posts from January 13, 2016

जान

जान नहीं जब पूरा नाता
विभेद ह्रदय में उपज जाता
ज्ञान नहीं कोई पूर्ण पाता
बीच राह में भ्रमित हो जाता अधकचरी सी बात सुनाता
असत्य सत्य नहीं बन पाता ©आराधना राय "अरु"

सुंदर-रूप तुम्हारा

सुंदर- सुमधुर रूप तुम्हारा
सागर जल ममता से हारा
देव आरती क्या मैं कहलाऊँ
सहज सुधा जीवन तुम्हारा भेद नहीं कहो क्या मैंने जाना
तुमने राम संग जीवन पहचाना अतुलित परम ही धर्म तुम्हारा
संग- साथ ना रहा कभी हमारा
गर्भरत्न मात्र इक रहा सहारा
क्यों ना दिया तुमने साथ हमारा आराधना राय "अरु"