Skip to main content

Posts

Showing posts from February 5, 2016

कहे क्या

कहे क्या वो आज़माने आये है
खुद का जी बहलाने आये है कहाँ से रंज इतना संग लाये है
बिन पिये ही वो लडखडाये है किसी सोच से वो टकरा आये है
इक मुद्दत के बाद वो मुस्कुराये है खुदी का सौदा जब कर आए है
कहे क्या किस बात पर पछताये है वक़्त की  चाल  देख आए है
आईने से आज क्यों वो घबराये है बड़े नाज़ से वो  समझाने आए  है
लगा जैसे वो हमारे "अरु "हमसाये है
आराधना राय "अरु"

दिल ने पाया है

गीत ---------------------------
दर्द दिल ने पाया है
जीने का सहारा है
ढल चुके नगमों में
हाले- गम हमारा है
दर्द दिल ने-----------------
वक्त ये हँसी कब है
जो मोड़ पे पुकारा है
आए ना खबर कुछ भी
किसे साथ ये गवार है
दर्द दिल ने----------------------- जिंदगी इक दरिया है
वक़्त में हम धारा है
संग-संग ही चलना है
क्या अजब इशारा है
दर्द दिल................. आराधना राय "अरु"

ग़ज़ल मंच की बात

30 जनवरी 2016 इस मुबारक दिन को प्रतिभा -मंच की  कामयाबी का जश्न कहा जाए तो ठीक ही होगा । गुलदस्ता -ए -ग़ज़ल , प्रतिभा मंच का यह पहला काव्य साँझा काव्य संग्रह है। यह अपनी तरह का पहला संकलन है,गौर करने की बात है , इसमें उर्दू की सभी गज़ल - हिंदी कविता देवनागरी लिपि में है।  अपने आप में अनमोल खास -और आम अवाम ( जनता )  की बात कहती ग़ज़ल वतन- परस्त शायर असद निज़ामी साहब के संपादन में 84 कलमकारों की आवाज़ है।  "उर्दू को हिंदी की जुबां से सुनिए" की आवाज़ को तीन महीने पहले असद निज़ामी साहब ने बुलंद हो कर एक  हिंदी को उर्दू अदब के साथ जोड़ कर वह्ट्स एप पर ग्रुप बनाया जो करीब एक हफ्ते में फेसबुक पर प्रतिभा-मंच के नाम से पहले दिन एक घंटे में 1500  लोगों से जुड़ गया । आज इस में करीब 16000 लोग हैजो अपनी मर्ज़ी से जुड़े है। सीधी -साधी जुबां में कहूँ तो हिंदी और उर्दू के माँ- और मौसी के रिश्ते की तरह, गैर मुस्लिम- और मुस्लिम दोनो एक छत के नीचे ज़मा है। जो आज की तारीख में हिंदू -मुस्लिम एकता की बात कहते है । 
प्रतिभा-मंच में खासा इंतजाम  किया गया ग़ज़ल सीखने और सीखाने का जो रोज़ाना फिलबदी और एक मतला एक शेर…