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Showing posts from March 24, 2016

एक बदनाम औरत

दुनियाँ के दोहरेमापदंड पर जीवन ना जी के उसने उसी जीवन को स्वीकार किया जो उसका का था,जिसे जीने के लिए, किसी से छिपना नहीं पड़ा।





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"ज़र्द चेहरा गुम है रंगत दिल कहे कुछ और है
                       बढ़ गई मुश्किल खुदाया हैरां मुस्लसल  कौन है "



सुंदर दो जोड़ी आँखे चेहरे पर टिका कर जब उसने पूछा तो राजन मन ही मन में शेर  कह उठा , हालांकि शायर नहीं था वो पर उर्वशी को देख कर हो जाना चाहता था ।
"दो मिनट रुकेगे" , कार में बैठे राजन से उसने कहा  ।
कोई बात नहीं आप जाए में इंतजार करूँगा, गोरा सुंदर चेहरा , सुडौल देहयिष्ट, शिफोन की नीली साड़ी में नीलाभ आभा लिए मासूम मुस्कुराहट लिए उर्वशी दुकान की ओर चली गई ।
राजन देर तक उसे देखता रहा, ना जाने क्या था जो उस की ओर खिंचा चला गया, तीन साल तक उसे देखता था पर बोलता नहीं था  ।
उसी के फ्लोर पर रहती रोज़ उसी के आफ़िस में उसे दिखाई देती रही, पर उस से बात करने की हिम्मत वो जुटा नहीं सका ।आज भगवान भी माँगे होते तो  मिल जाते वो धीरे से मुस्कुरा…