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Showing posts from May 4, 2016

नज़्म ------------समाती रही

साभार गुगल


वक्त कि धार पर मैं बहती  रही
वो समुंदर था उसमे समाती रही

दिल कि बातें  तेरी लुभाती रही
हाल  ए दिल  अपना छुपाती रही

गीत लबों से तेरा गुनगुनाती रही
याद आ - आ कर तेरी तडपाती रही

धड़कने दिल कि मेरी बताती रही
 पास हर धड़ी तू है मेरे जताती रही

जिंदगी मौत बन  करीब आती रही
दिल से जां का रिश्ता निभाती रही

ठहरे पानी में अक्स रोज़ देखती रही
बात बनती बिगड़ती अरु देखती रही

आराधना राय "अरु"


وقت کہ کنارہ پر میں بہتی رہی
وہ سمندر تھا اسمے سماتي رہی

دل کہ چیزیں تیری مشابھت اختیار رہی
حال اے دل اپنا چھپاتا رہی

نغمہ لبوں سے تیری گنگناتی رہی
یاد آ - آ کر تیری تڈپاتي رہی

دھڑکنے دل کہ میری بتاتی رہی
  پاس ہر دہی تو ہے میرے جتاتي رہی

زندگی موت بن قریب آتی رہی
دل سے جاں کا رشتہ ادا کرتی رہی

ٹھہرے پانی میں عکس روز دیکھتی رہی
بات بنتی بگڑتی ار دیکھتی رہی

آرادنا رائے "ار"