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Showing posts from June 10, 2016

जिंदगानी

साभार गुगल

 नज़्म------------ मिट्टी में पल रही है हसीन जिंदगानी
कंधो पे उसके है कितनी ज़िम्मेदारी वक्त ने दिखाई हमको अजब हक़ीकत
जो जानते है सब कुछ उनसे हुई दुश्वारी तुम मानो या ना मानो हमको यही यकीं है
अपनों में रह कर तूम कुछ कर लो पर्दादारी जो साथ तेरा निभा दे बावफा के बेवफ़ा है
रखना साथ उसके तू थोड़ी सी ईनामदारी आराधना राय "अरु"

सनम

साभार गुगल नज़्म बगेर रदीफ और काफिए कि लिखी जाती है---और एक उन्वान पे लिखी जाती है
  सनम --------------------------------------------------

आज जान पे बन आई है सनम आग सीने में लगी गई है सनम
पत्थर दिल लिए बैठे है सनम किस से खेल कर बैठे है सनम मय मीना और मैखाना लिए है फिर तुझे ही हम खोजते है सनम
रात  का दिन पर पहरा है कायम  हम बस तुझे ही  देखते है सनम

आराधना राय "अरु"