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Showing posts from August 20, 2016

नज्म

नज्म इश्क़ कि बाते सभी करते है क्या जाने   दिल अपना के रखते है क्या वो क्या जाने
इश्क़ का जादू है मिराज़ है धोका क्या जाने
मर कर जीते  है रस्म ए अदायगी क्या जाने

आग सीने में लगी है दिल का तमाशा क्या जाने  दो बूंद थे दिल के छलक गए वफा के नाम क्या जाने

वो खाक उड़ाते है, रास्तों पर क्यू  कहाँ क्या जाने हम उनको दुआ देते है,रह रह कर अरु क्या जाने

नज्म आराधना राय अरु
नज्म में भार तोल माप होता है पर रदीफ और काफिया नहीं