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Showing posts from August 27, 2016

रेज़गारी

बात1976 की है, हम उन दिनों राम कृष्ण पुरम सेक्टर -6 में रहते थे। मुझे तो आज तक उस घर का नम्बर भी याद है, A 198 पास ही स्कुल था और स्कुल के सामने घर। बड़ी दीदी को 5 पैसे मेरी मझली दीदी को भी 5 पैसे और भाई और मुझे भी 5 पैसे रोज़ के मिलते थे। पांच पैसे मेरे हाथ में जैसे ही आए.में आइस बार लेने की सोची, बड़ी दीदी ने चुपचाप एक गुलक में डाल दिए। मझली दीदी को क़िताबे पढने में रूचि थी पर किराये पर भी किताब 25 पैसे में थी,सो उनके पैसे भी गुलक में गए भाई स्कूल पेदल आता जाता था सोउसके पाच पैसे भी गुलक में गए। शाम तक 5 पैसे को हाथों में लेकर बैठी रही,क्या पाता बर्फ का गोला मिल जाए या राम जी की खट्टी -मिट्टी गोलियां,पर घर के आस पास कोई खोमचे वाला नहीं आया था। बड़ी दीदी 12 साल की थी मझली दीदी 9 साल की और मैं और भाई जुड़वाँ थे, 6 साल के। उस दिन लगा, काश बड़े होते तो मज़े से पैसे को जेब में रख कर गोला तो खा ही सकते थे।उस दिन वाला सिक्का क्या हर दिन ५ पैसे गुल्क पे मेहरबान हो गए। बड़ी दीदी ही सब में समझदार थी,उन्होंने कहा महीने भर बाद सब सब के पैसे इक्कठे हो जाएगे तब कुछ खरीदेगे , दीदी बड़ी थी उन की बात हम भाई ब…