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Showing posts from August 31, 2016

आना

घर भले ही खाली हाथ आ जाना
गुज़रा वक्त तूम साथ ले आना

हमने जाना नही तुमने माना नहीं
कब हुई दोस्ती हमने पहचाना नहीं

आसमान मेरे सर पर हमेशा रहा
छांव एक टुकड़ा सही संग ले आना

जब भी आना मेरे घर तूम ही आना
सोई सी  इस नज़्म को बोल दे जाना

आराधना राय "अरु"

पुकारा है

दर्द ये गम ए दिल का आखिरी सहारा है दर्द से जीवन को हमने हर- पल संवारा है
मेरे इन लबों पे फ़िर ज़िक्र अब तुम्हारा है साँस - साँस कहती है दिल से दिल हारा है
हाथ में लहू देखकर तुमने सोचा कातिल है काम कर गयी रोशनाई वो सितम हमारा है
दोस्त से वफ़ा कर ली दुश्मनी हजार की है जां से मेरी जान लेकर किसने अब पुकारा है
आराधना राय "अरु"