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Showing posts from March 3, 2017
देख कर आए है दुनियाँ सारी
ना वो दर रहा ना वो घर रहा
आँधियों  का डर नहीं था धरोंदे को
मेरा दिल ही हादसों के नज़र रहा
तोड़ दी कमर मेरी गरीबी ने
मै जहां रहा  बे शज़र रहा
आ गए याद मुझे चहरे पुराने
उन्ही के नगर बे डगर रहा
अरु

आज बिरज की नगरी मैं होगा शोर
नाचे जहाँ सब के मन के मोर रे
चैत नेह बरसा रहा हँसे बदरा घनघोर
चुप क्यों खड़े हो बसी बाजियां चितचोर रे